Sunday, July 28, 2013

प्रार्थना -बरसात में रोटी खिलाएं (ये कविता नहीं है )

प्रार्थना -बरसात में रोटी खिलाएं 
(ये कविता नहीं है )

बरसात में,बेचारी गायें
चौराहों और सड़कों पर न आयें 
तो बताइए कहाँ जाएँ .
आपके -हमारे वाहनों से 
अपाहिज हो कर भी 
कहाँ जाएँ ,जरा बताएं .

खेत खलिहान बचे नहीं ,
पॉलिथीन में भरा बदबूदार भोजन
पशुओं को पचे नहीं .

खेती की जमीन को -
इंटों के मकानों के नाम,
एन - ए बनाकर
कलेक्टर ने बिल्डरों को
कर दिया नीलाम.

गाय को रोटी निकालने का रिवाज
सिन्दूर लगाने की तरह हो गया है बंद,
सारे रिश्ते बिक गये
सिक्कों में चंद.

हल्कू ने चारे की जगह
इंटें बनाने का भट्टा लगा दिया
गायों को दूध देने का
कितना अच्छा सिला दिया .
जाएँ तो कहाँ जाएँ !
कृपया आप ही बताएं
गायें सड़कों न जाएँ
किसी के हाथों गोश्त के लिए
न बेचीं जाएँ तो कहाँ जाएँ .
कम से कम गोकशी से पहले
तक तो भोजन की गारंटी है ,
वरना उन बेचारियों को
योजना आयोग की क्या वारंटी है .

डॉ अजय

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