Monday, December 14, 2009

ग़ज़ल :ऐसे कम ही हैं

कोई क़म नहीं सितारे फलक पर लेकिन ,

अंधेरों में रास्ता दिखाएँ ऐसे कम ही हैं !

हर रोज़ जमाना अपनी रफ़्तार बदलता है ,

ज़माने की रफ़्तार बदल दें ऐसे कम ही हैं !

कोई भी/कोई नहीं अपना /पराया होता है ,

एक ही नज़र से सबको देखे ऐसे कम ही हैं !

बहुत हैंबात बिगाड़ने वाले दुनिया में अजय,

बिगरे को बना दें अब लोग ऐसे कम ही हैं !!

3 comments:

अर्शिया said...

दुनिया का सच्चा स्वरूप आपने दिखा दिया।
शुक्रिया।
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ये तो बहुत ही आसान पहेली है?
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

अजय कुमार said...

उम्दा गजल , बधाई

निर्मला कपिला said...

बहुत अच्छी गज़ल है बधाई