Sunday, November 29, 2009

आज कुछ लिखने का मन नहीं

दोस्तों,

बहुत लिखा पर लगा कि हकीकत उस दौर की नहीं !
सच मैं इसलिए आज कुछ भी लिखने का मन नहीं !!

आरज़ू , फ़साने या फिर हों उनके किए गए चंद वादे !
नहीं कुछ भी निभाया ,आज कुछ लिखने का मन नहीं !!

कुछ उनके और कुछ अपने हालत ठीक नहीं हैं अब तो !
इनायत से नाराज हैं ,आज कुछ लिखने का मन नहीं !!

शायद होगी बहुत देर जब फिर से कलम उठे हमारी !
आज मगर हालात ऐसे की कुछ लिखने का मन नहीं !!

1 comment:

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

'' कुछ लिखने का मन नहीं ''
........... से आगे बढ़ कर सोचिये मान्यवर , तब बात बने |