Monday, August 2, 2010

मोबाइल का सच

जब हम मोबाइल पे
बात करते हैं तो हँसते- खिलखिलाते हैं ,
पर जब -
होते हैं आमने सामने तो
सिर्फ हेलो कह कर गुजर जाते हैं !
अजीब जमाना है .......

पिता ने फ़ोन किया कि तबियत ठीक नहीं
अलग शहर में रह रहे लड़के ने पूंछा-
अरे क्या हुआ पापा !
ध्यान रखा कीजिये
मैं तुरंत पंहुच जाऊंगा
बस मुझे बता भर देना ।
असहाय और बीमार बाप ने
मन ही मन सोचा -
और कैसे बताऊंगा !
अजीब ज़माना है ..........

मोबाइल पर पति /पत्नी ने कहा
मैं आप को मिस कर रही /रहा हूँ
शाम जब दोनों मिले
तो अलग-अलग करवट सो गए ,
दिन के हवाई प्यार के वादे -
हवा हो गए !
अजीब ज़माना है ............

दोस्त ने दोस्त को कहा -
चिंता मत कर मैं तो हूँ
कोई भी जरूरत हो तो बता देना
दोस्त ने कहा -
शायद कुछ समय में रुपयों कि जरूरत हो
दोस्त ने कहा -चिंता नहीं
फिर जब दोस्त ने मोबाइल किया
तो उसे अजीब सा खौफ था ,
क्यूंकि दोस्त का मोबाइल ऑफ़ था !
अजीब ज़माना है.........

तो दोस्तों -क्या जरूरत है दोगले बनने की
जिन्दगी बिना झूंठ के भी चल सकती है
मोबाइल बिना भी सरक सकती है
कृपया दो तरह के सम्बन्ध न बनायें -
एक मोबाइल वाला /एक असली ,
वर्ना मानवीयता की टूट जाएगी
हड्डी -पसली !
अजीब ज़माना है .................



3 comments:

SRINIVASA RAO said...

Wow... Dr sab!! Wow...
Friends, Lets have the taste of cell phone in real sense and decide either to be used or not to be used.
But the fact is.. without a mobile, we can't even breath....
Drop ur openion!!

माधव said...

well knitted

Udan Tashtari said...

अजीब ज़माना है ........


सच कहा-दो तरह के संबंध हो ही गये हैं.