Monday, March 8, 2010

ग़ज़ल : ईंटों की तरह आग में पकाए जायेंगे .....

ग़ज़ल
जज्बात जख्म और दर्द के अपने आंसू अपने पास ही रखो ,
वर्ना दूसरे तेरे आंसुओं में अपने व्यापार की नाव चलाएंगे !
इंसानियत के मकाँ की ता -उम्र हिफाज़त के लिए दोस्त ,
ये समझ कि शब्द भी ईंटों की मानिंद आग में पकाए जायेंगे !!
अब झुग्गियों में रहने वालों पे भी बिना देखे इनायत न कर ,
ज्यादा दाम मिलते ही ये तेरे क्या मुल्क के भी नहीं रह पाएंगे !
हम किसी मुफ़लिस के गरीबखाने हों या महमान शहंशाह के ,
"अजय "ज़माने के ये हालात तुछे कभी भी नहीं बदल पाएंगे!

2 comments:

ktheLeo said...

वाह, दमदार बात!खूबसूरत अल्फ़ाज़!

venus kesari said...

वाह, दमदार बात!खूबसूरत अल्फ़ाज़ :):)