Monday, June 28, 2010

ग़ज़ल;- टूटन का इलाज

दोस्तों जिन्दगी की अदा अजीब होती है ,
वो सबसे मंहंगी और सस्ती चीज होती है !

कई चारगार आये इसे समझने के लिए ,
ये पहेली किसी पहलू से हल नहीं होती है !

दर्द जैसा आपका है सबको भी होता ही है ,
ये तो सोने के बदले बालू की खरीद होती है !

'अजय' क्या करें और क्या न करें को छोड़ो ,
दर्द की तासीर जिन्दगी से बड़ी नहीं होती है !

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

vikas said...

अंतिम पंक्ति ने सब कुछ बयां कर दिया ..बेहतरीन

विकास पाण्डेय
www.vicharokadarpan.blogspot.com